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हैरेसमेंट : यूथ की मानसिकता पर सवाल 


हाल ही में, जोधपुर शहर के जाने माने इलाके, सुखानंद की बगेची में एक शर्मनाक घटना घटित हुई ।


एक 19 वर्ष के लड़के ने नाबालिग लड़की के साथ छेड़ छाड़ की और भाग निकला । मामला दर्ज हुआ है की आबिद नामक इस लड़के ने पहले भी कही बार इस तरह के प्रयास किए है । परंतु इस बार सी सी टीवी फुटेज में पूरा मामला रिकॉर्ड होने के कारण वह पकड़ा गया ।


सवाल यह उठता है, की लडको की मानसिकता इतनी घटिया कैसे हो रही है । कैसे उनमें इतनी हिम्मत आ जाती है की सरे राह एक लड़की को छेड़ कर भाग निकले ।


दुनिया भर में तमाम जगह ऐसे मामले हर रोज सुनने को आते है । इन्हे इंसान रूपी दरिंदे कहने में भी कोई हर्ज नहीं होगा । ऐसे मामले जब अपनी सीमा तोड़ कर सुनने में आने लगे, तो यह कर सकना भी उचित होगा की इस प्रकार के कृत्य का दंड केवल मृत्यू है ।


किस प्रकार के तत्व है जो लडको को इस प्रकार के कृत्य करने की और प्रेरित कर रहे है, जिससे उनकी खुद की जिंदगी तो खराब हो ही रही है, साथ ही जिस लड़की के साथ इस प्रकार का कु कृत्य होता है, वह खुद भी असुरक्षित जिंदगी और जीवन भर की शर्म का सामना कर के जीने को मजबूर हो जाती है । 


दोष किसका है ? माता पिता का जो अपने बच्चो को अच्छे संस्कार देने में सक्षम नहीं है । जिस तरह से शुरू से ही लड़कियों पर इतनी पाबंदियां की जाती है और लडको को हमेशा से ही इतनी आजादी दी जाती है की वे कही जाए, कुछ भी करे, किसी भी वक्त घर आए, किसी भी वक्त बाहर जाए आधी रात तक सड़को पर घूमे । अब वक्त आ गया है की उनसे ये आजादी छीन ली जाए, उन पर पहरे लगाए जाए, उन्हें काबू में रखा जाए ।


अगर बचपन से ही किसी लड़के में इस प्रकार की सोच का जन्म हो जाए तो जरूरी है कि उसे समाज से पृथक कर दिया जाए । उसे समाज का हिस्सा बने रहने का कोई भी हक नही होना चहिए । जरूरी है अब भारी निर्णय लिए जाए । और दूसरी तरफ लड़कियों को जिस तरह पाबंद किया जाता है उससे अच्छा होगा की, उन्हे इतना सक्षम बनाया जाए की वे अपनी रक्षा खुद कर सके, इस तरह की परिस्थिति में वो अपने दोषी को खुद सज़ा दे सके । बहादुरी से सामना कर सके ना की शर्म से घर में कैद कर दी जाए ।


दूसरा प्रभाव, आसन शब्दो में इंटरनेट, मोबाइल का इतनी आसानी से उपयोग, जिसकी वजह से कुछ गलत वेबसाइट्स तक यूथ का पहुंच पाना, जिससे उनमें घटिया सोच का जन्म लेना भी मुमकिन है । आज कल का सिनेमा भी भद्दी गालियां से भरा हुआ है जो इस तरह की मानसिकता को बढ़ावा दे रहा है । जिनके लिए बस ये एक पैसा कमाने का जरिया है उन्हे इस सोच को जन्म देने के लिए कोई अफसोस भी नहीं होगा । किन्तु जरूरी है की इस पर भी रोक लगाने के लिए कड़े कदम उठाए जाए । आवश्यक है की इस सोच को जो भी आयाम बढ़ावा दे रहे है उन्हे जड़ से खत्म कर दिया जाए ।


साथ ही इस तरह के अपराध करने वाले अपराधियों एवम उनकी सोच को भी जड़ से खत्म करने के कुछ कठिन प्रयास करने होंगे, चाहे इसके लिए कोई भी कीमत क्यू ना चुकानी पड़े ।


यूथ की दुर्गति होती जा रही है और इस तरह के क्राइम्स बढ़ते जा रहे है । पर एक बात तो साफ है, कुछ लड़कियों के साथ इस प्रकार के हादसे होने से, दूसरी लड़कियों के जीवन को भी कंट्रोल किया जाता है, उन्हें पर्दो में रहने को मजबूर किया जाता है । कुछ लोगो की घटिया सोच की वजह से सहना केवल लड़कियों को पड़ता है । इस असुरक्षा की भावना से लड़कियों का जीवन और दुर्भर होने वाला है । 


जोधपुर शहर में घटित हुए इस हादसे के बाद, शहरवासियों में भी अपनी बच्चियों को लेकर असुरक्षित भावना आ चुकी है, सबकी मांग भी यही है की इस तरह का अपराध करने वाले लड़के को भयावह दंड दिया जाए की आगे भविष्य में वह फिर से ऐसी हिम्मत ना कर पाए और ना ही कोई अन्य असामाजिक तत्व इस तरह का प्रयास कर ने की हिम्मत कर सके ।


Tags: Harrasment News Crime Jodhpur khushboo Sharma


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